हरि भक्ति और सत्संग से होता है मानव जीवन , सार्थक: महंत श्री श्याम सुंदर जी महाराज
विजय कुमार बंसल मुख्य संपादक
श्यामपुर स्थित प्रसिद्ध श्री श्याम वैकुंठ धाम में आयोजित भव्य सत्संग के दौरान प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरूप श्री श्याम सुंदर जी महाराज ने श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान हरि की भक्ति अनंत है और यही भक्ति भवसागर से पार लगाने वाली दिव्य नैया है। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि निष्काम भाव से भगवान का स्मरण, भजन और सत्संग करता है तो उसका जीवन सुख, शांति और आनंद से परिपूर्ण हो जाता है।श्री महाराज ने कहा कि सत्संग सत्य की वह पावन संगति है, जो मनुष्य को धर्म, सदाचार, प्रेम, करुणा और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। सत्संग से मन के विकार दूर होते हैं, आत्मा निर्मल बनती है और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा जागृत होती है। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम ही कलियुग में सबसे बड़ा सहारा है, जिसके स्मरण मात्र से जीवन के अनेक कष्ट दूर होने लगते हैं।उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने दैनिक जीवन में प्रभु भक्ति, सत्संग, सेवा, दया और परोपकार को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए इसे ईश्वर की आराधना और लोककल्याण के कार्यों में लगाना ही सच्ची सफलता है। सत्संग के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर भगवान हरि का गुणगान किया तथा समस्त विश्व के सुख, शांति और मंगल की प्रार्थना की। इस अवसर पर परम पूज्यस महंत ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा गुरु के पावन वचन मनुष्य जीवन को धन्य तथा सार्थक कर देते हैं गुरु की शरण मनुष्य के भाग्य का उद्धार कर देती है
