विजय कुमार बंसल मुख्य संपादक
लंबे समय से हरिद्वार के मुख्य बाजारों में चल रही समस्या को लेकर हरिद्वार के प्रतिष्ठित व्यापारी द्वारा जिला अधिकारी को दिया गया ज्ञापन
सेवा में,
श्रीमान जिलाधिकारी हरिद्वार, उत्तराखंड
विषय : सड़क निर्माण/खुदाई कार्य के दौरान पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त कर जनसामान्य की जलापूर्ति बाधित करने वाले संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई, क्षति की वसूली एवं ब्लैकलिस्ट/डिबार करने की कार्रवाई किए जाने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि विष्णु घाट बाजार, हरिद्वार में संबंधित विभाग/कार्यदायी संस्था द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण/मरम्मत/अन्य कार्य के दौरान संबंधित ठेकेदार द्वारा सड़क की खुदाई/तोड़फोड़ के दौरान पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त कर दी गई।
पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण स्वच्छ पेयजल सड़क/नालियों में बह रहा हैं तथा आसपास के घरों एवं दुकानों की जलापूर्ति बाधित हुई। और तीर्थ यात्रियों को पेयजल की असुविधा हो रही है इससे स्थानीय निवासियों, व्यापारियों एवं आमजन को गंभीर परेशानी हुई तथा सार्वजनिक पेयजल की भी भारी बर्बादी हुई।
सरकारी निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार का यह दायित्व है कि कार्य के दौरान भूमिगत पेयजल लाइन एवं अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं को नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक तकनीकी सावधानियां बरते। यदि जांच में यह पाया जाता है कि संबंधित ठेकेदार ने अपेक्षित सावधानी नहीं बरती अथवा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया, तो यह गंभीर संविदात्मक एवं विभागीय अनियमितता है।यह मामला केवल पाइप टूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसामान्य की पेयजल आपूर्ति बाधित होने, सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचने और सरकारी संसाधन की बर्बादी से संबंधित है।भारतीय न्याय संहिता, 2023 में ऐसे कृत्य के संबंध में दंड का प्रावधान है जिससे मानव के पीने अथवा अन्य उपयोग के लिए पानी की आपूर्ति कम हो, यदि उस अपराध के आवश्यक तत्व जांच में स्थापित होते हैं।
अतः मेरी स्पष्ट एवं पुरजोर मांग है कि—
1. संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध तत्काल विभागीय एवं तकनीकी जांच कराई जाए तथा जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
2. यदि जांच में ठेकेदार की लापरवाही अथवा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन सिद्ध होता है तो उसके विरुद्ध कठोरतम उपलब्ध दंडात्मक एवं संविदात्मक कार्रवाई की जाए।
3. क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन की मरम्मत, जलापूर्ति बहाली तथा सार्वजनिक संपत्ति को हुई क्षति का पूरा खर्च संबंधित ठेकेदार से वसूल किया जाए।
4. ठेकेदार के लंबित भुगतान/बिल से नियमानुसार क्षति एवं मरम्मत की राशि की वसूली की जाए तथा आवश्यकता होने पर Performance Security/अन्य उपलब्ध वित्तीय सुरक्षा से भी समायोजन किया जाए।
5. ठेकेदार द्वारा कार्य के दौरान गंभीर लापरवाही अथवा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन सिद्ध होने पर उसे भविष्य के सरकारी कार्यों से रोकने हेतु लागू नियमों के अंतर्गत उसके विरुद्ध Blacklisting/Debarment की कार्रवाई प्रारंभ की जाए।
6. यदि जांच में आपराधिक कृत्य के आवश्यक तत्व पाए जाते हैं तो भारतीय न्याय संहिता सहित अन्य लागू कानूनों के अंतर्गत संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध प्राथमिकी/कानूनी कार्रवाई हेतु सक्षम प्राधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाए।
7. जांच पूरी होने तक संबंधित घटना से जुड़े CCTV फुटेज, कार्यस्थल के फोटो-वीडियो, माप पुस्तिका (Measurement Book), कार्यादेश, ठेका/Agreement, संबंधित तकनीकी रिकॉर्ड एवं अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि बाद में किसी प्रकार के साक्ष्य से छेड़छाड़ की संभावना न रहे।
8. प्रभावित घरों एवं दुकानों की जलापूर्ति तत्काल बहाल कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठेकेदार को स्पष्ट तकनीकी एवं सुरक्षा निर्देश जारी किए जाएं।
9. की गई जांच, निर्धारित जिम्मेदारी तथा संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध की गई कार्रवाई की लिखित सूचना शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।
महोदय, सरकारी सड़क निर्माण का कार्य जनसुविधा के लिए होता है, लेकिन यदि उसी कार्य के दौरान आमजन की पेयजल आपूर्ति बाधित हो और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचे तो इसकी जवाबदेही भी तय होना आवश्यक है।
अतः अनुरोध है कि इस प्रकरण को सामान्य शिकायत मानकर केवल पाइपलाइन की मरम्मत तक सीमित न रखा जाए, बल्कि दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक, आर्थिक एवं संविदात्मक कार्रवाई तथा Blacklisting/Debarment की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
भवदीय
संदीप गुप्ता
समाजसेवी, जिला उपाध्यक्ष प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तराखंड
हरिद्वार
मोबाइल : 9897283602
दिनांक : 02 10 2026
स्थान : हरिद्वार
