मन की पवित्रता और हरि भक्ति से ही मानव जीवन होता है सफल : श्री महंत कमलेशानंद सरस्वती महाराज हरिद्वार,
वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार बंसल खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध गंगा भक्ति आश्रम में आयोजित सत्संग एवं भजन संध्या के दौरान प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान 1008 श्री महंत कमलेशानंद सरस्वती महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने मन को एकाग्र एवं निर्मल बनाकर भगवान श्रीहरि की भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तीर्थ यात्रा तभी सार्थक होती है, जब मन भी उसी प्रकार पवित्र और निष्कलुष हो, जिस पवित्र उद्देश्य से श्रद्धालु तीर्थस्थल की ओर प्रस्थान करता है।महंत श्री ने कहा कि मन के विकार, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और मोह को त्यागकर यदि मनुष्य भजन, सत्संग और प्रभु स्मरण में स्वयं को समर्पित कर दे, तो उसका जीवन स्वतः ही आनंद, शांति और दिव्यता से भर जाता है। भगवान की भक्ति ही वह अमृत मार्ग है, जो मानव को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर परम कल्याण की ओर अग्रसर करता है।
उन्होंने कहा कि दान, सत्य, सेवा, परोपकार और सद्कर्म ऐसे दिव्य साधन हैं, जो मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप एवं संतापों का नाश कर उसे ईश्वर की कृपा का पात्र बनाते हैं। सत्संग मनुष्य के अंतःकरण को प्रकाशित करता है तथा उसे धर्म, सदाचार और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जो व्यक्ति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण भाव से भगवान श्रीहरि का स्मरण करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, संतोष और आध्यात्मिक उन्नति का स्वतः ही उदय होने लगता है।सत्संग के उपरांत श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भावविभोर होकर सहभागिता की तथा आश्रम में उपस्थित संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। संपूर्ण वातावरण हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय एवं आध्यात्मिक उल्लास से ओतप्रोत हो उठा।
